भारत को अब चीन के मैग्नेट (Magnets) की ज़रूरत नहीं — जानिए कैसे बनी यह नई मोटर(Magnet Free Motor) टेक्नोलॉजी
दुनिया की लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रिक मोटर (Electric Motor) में एक शक्तिशाली मैग्नेट लगता है, और इन मैग्नेट के कच्चे माल (रेयर-अर्थ एलिमेंट्स — Rare-Earth Elements) की प्रोसेसिंग का 90% से ज़्यादा हिस्सा चीन के पास है। अब भारत के कुछ स्टार्टअप्स ने मैग्नेट-फ्री मोटर (Magnet-Free Motor) बनाई है, जिसे इन मैग्नेट की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। आइए समझते हैं कि यह कैसे काम करती है और भारत के लिए यह क्यों मायने रखती है।

पहले समझें — एक साधारण (Conventional) मोटर कैसे काम करती है?
किसी भी इलेक्ट्रिक मोटर के दो मुख्य हिस्से होते हैं — स्टेटर (Stator), जो स्थिर रहता है, और रोटर (Rotor), जो घूमता है। स्टेटर की कॉइल (Coil) में बिजली दौड़ने से एक घूमता हुआ मैग्नेटिक फील्ड (Magnetic Field) बनता है, और रोटर उसी के पीछे-पीछे घूमने लगता है।
ज़्यादातर आधुनिक मोटरों, खासकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) की मोटरों, के रोटर में एक परमानेंट मैग्नेट (Permanent Magnet) लगा होता है। यह मैग्नेट बनता है रेयर-अर्थ एलिमेंट्स (Rare-Earth Elements) से, जैसे नियोडिमियम (Neodymium)। ये मैग्नेट छोटे आकार में बहुत ताकतवर होते हैं, इसीलिए इन्हें इतना पसंद किया जाता है। समस्या यह है कि इनकी प्रोसेसिंग पर लगभग पूरी तरह चीन का नियंत्रण है।

तो इस नई मोटर में क्या अलग है?
मैग्नेट-फ्री मोटर (Magnet-Free Motor) में रोटर पर कोई रेयर-अर्थ मैग्नेट नहीं होता। मैग्नेट का काम सॉफ्टवेयर (Software) और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स (Power Electronics) करते हैं। इसके दो तरीके भारत में चर्चा में हैं:
- इलेक्ट्रॉनिक फील्ड (Electronic Field): बेंगलुरु की विमैग लैब्स (Vimag Labs) की मोटर में रोटर का मैग्नेटिक फील्ड रियल-टाइम में पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और कंट्रोल एल्गोरिदम (Control Algorithm) से बनाया जाता है। कंपनी इसे “वर्चुअल मैग्नेट” (Virtual Magnet) टेक्नोलॉजी कहती है।
- रिलक्टेंस सिद्धांत (Reluctance Principle): चारा टेक्नोलॉजीज (Chara Technologies) की मोटर रिलक्टेंस (Reluctance) के सिद्धांत पर चलती है। इसमें रोटर लोहे जैसी चुंबकीय सामग्री से बना होता है, और घूमना स्टेटर के फील्ड की ओर खिंचने से होता है। इस मोटर को सही चलाना मुश्किल है, इसलिए कंपनी मोटर और कंट्रोलर (Controller) को साथ मिलाकर डिज़ाइन करती है।
सीधे शब्दों में: पहले काम “ताकतवर मैग्नेट” करता था, अब वही काम “स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर” करते हैं।
मैग्नेट-फ्री मोटर के फायदे (Pros)
- चीन पर निर्भरता कम: रेयर-अर्थ मैग्नेट की सप्लाई रुकने या महंगी होने का जोखिम घटता है।
- सप्लाई चेन (Supply Chain) ज़्यादा सुरक्षित: चारा के अनुसार उनकी मोटर में स्टील, एल्यूमिनियम, कॉपर और फेराइट मैग्नेट (Ferrite Magnet) जैसी सामग्री भारत में ही मिल जाती है।
- लागत में कमी की उम्मीद: चारा का अनुमान है कि बड़े स्तर पर बनने पर उनकी मोटर 15–20% सस्ती हो सकती है। ध्यान रहे, यह कंपनी का अनुमान है, अभी की कीमत नहीं।
- ज़्यादा गर्मी में भी भरोसेमंद: चारा के अनुसार इसमें ऊँचे तापमान पर मैग्नेट कमज़ोर पड़ने (Demagnetisation) का खतरा नहीं रहता।
- कीमत में स्थिरता: रेयर-अर्थ की कीमतें भू-राजनीति (Geopolitics) पर निर्भर होती हैं, जबकि इस मोटर का कच्चा माल ज़्यादा आम है।
भारत की कंपनियां जो इस पर काम कर रही हैं
- विमैग लैब्स (Vimag Labs), बेंगलुरु: सितंबर 2025 में शुरू हुई इस कंपनी को रेयर-अर्थ-फ्री मोटर के लिए अब तक 5 भारतीय पेटेंट (Patent) मिल चुके हैं। कंपनी ने हाल ही में $5 मिलियन की सीरीज़ A फंडिंग (Series A Funding) जुटाई, जिसका नेतृत्व एक्सल (Accel) ने किया। टू-व्हीलर और पैसेंजर वाहन बनाने वाली कंपनियों के साथ पायलट (Pilot) चल रहे हैं।
- चारा टेक्नोलॉजीज (Chara Technologies): पाँच साल से मैग्नेट-फ्री मोटर पर काम कर रही है। इसकी मोटरें 8 kW से 35 kW की रेंज में हैं, जो टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, छोटी कारों और ट्रैक्टर-फोर्कलिफ्ट जैसे वाहनों के लिए ठीक हैं। मौजूदा उत्पादन क्षमता लगभग 25,000 मोटर प्रति वर्ष है।
- कोनिफर (Conifer): अमेरिका-आधारित, पर भारतीय संस्थापक वाली कंपनी, जिसका पुणे में प्लांट है। यह पूरी तरह मैग्नेट-फ्री नहीं है। यह रेयर-अर्थ की जगह फेराइट मैग्नेट (Ferrite Magnet) इस्तेमाल करती है, जो सस्ते और आसानी से मिलते हैं।
- स्टर्लिंग गेटेक ई-मोबिलिटी (Sterling Gtake E-Mobility): ब्रिटेन की टेक्नोलॉजी के लाइसेंस पर रिलक्टेंस मोटर (Reluctance Motor) बना रही है। रिपोर्ट के अनुसार सात भारतीय ऑटोमेकर इसे परख रहे हैं।

भारत के लिए असली फायदा (Revenue Potential)
SBI की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में करीब $291 मिलियन के रेयर-अर्थ मैग्नेट आयात (Import) किए, जबकि पिछले चार सालों का औसत लगभग $249 मिलियन था। यानी आयात का बिल बढ़ रहा है। भारत के पास दुनिया के पाँचवें सबसे बड़े रेयर-अर्थ भंडार (Reserves) हैं, फिर भी वह इन्हें मैग्नेट में प्रोसेस नहीं कर पाता।
अगर मोटर बनाने वाली कंपनियाँ मैग्नेट-फ्री मोटर पर आ जाएँ, तो इस आयात का एक हिस्सा बचाया जा सकता है। इसके साथ देश के भीतर मोटर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रोज़गार के नए मौके बन सकते हैं। ध्यान रहे, अभी इसका कोई आधिकारिक आँकड़ा नहीं है कि भारत को इससे कुल कितनी कमाई होगी। यह एक संभावना है, पक्की गिनती नहीं।
सरकार भी इस दिशा में कदम उठा रही है। 2025 में नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (National Critical Mineral Mission) शुरू हुआ, जिसके लिए 2025–2031 के लिए ₹18,000 करोड़ रखे गए हैं।
भारत हर साल रेयर-अर्थ मैग्नेट इम्पोर्ट करने में करीब $291 मिलियन खर्च करता है। ग्लोबल रेयर-अर्थ-फ्री मोटर मार्केट की वैल्यू 2026 में लगभग $2.1 बिलियन है।
एक्सपोर्ट (Export) की संभावना और उसके फायदे
चारा टेक्नोलॉजीज के पास अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर होने की रिपोर्ट है, और कंपनी विदेशी बाज़ारों में उतरने की योजना बना रही है। चूँकि दुनिया की कई कंपनियाँ चीन के मैग्नेट पर निर्भरता घटाना चाहती हैं, इसलिए ऐसी मोटरों की माँग बढ़ने की उम्मीद है।
एक्सपोर्ट से भारत को तीन फायदे मिल सकते हैं:
- कच्चा माल नहीं, बल्कि तैयार टेक्नोलॉजी वाला उत्पाद (Value-Added Product) बेचने का मौका।
- विदेशी मुद्रा की कमाई।
- वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की मज़बूत जगह।
किन क्षेत्रों (Sectors) में होगा सबसे ज़्यादा इस्तेमाल?
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV): टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और छोटी कारें।
- कृषि (Agriculture): इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर और खेती के उपकरण।
- इंडस्ट्री (Industry): फैक्ट्री मशीनरी, फोर्कलिफ्ट और पंप।
- विंड एनर्जी (Wind Energy): पवन चक्कियों के जनरेटर।
- अन्य: रोबोटिक्स, रक्षा और कूलिंग सिस्टम, जिन पर विमैग काम करने की बात कहती है।

क्या अभी भी कुछ अनिश्चित है?
हाँ, कई बातें अभी साफ़ नहीं हैं।
- दावे अभी बड़े स्तर पर परखे नहीं गए: विमैग का कहना है कि उसकी मोटर मैग्नेट वाली मोटर के बराबर या बेहतर चलती है, पर यह बड़े पैमाने के उत्पादन में अभी सिद्ध नहीं हुआ है।
- वज़न: चारा के अनुसार उनकी मोटर लगभग 10–15% भारी है।
- कंट्रोलर चिप्स (Controller Semiconductors): इनके लिए भारत अब भी आयात पर निर्भर है।
- तेज़ रफ्तार कारें: हाई-स्पीड पैसेंजर कारों के लिए यह टेक्नोलॉजी अभी विकास (Development) में है।
- कीमत और समय: अभी कई कंपनियों ने पक्की कीमतें और बड़े पैमाने पर उत्पादन की तारीख़ें नहीं बताई हैं।
इलेक्ट्रिक वाहन, दोपहिया-तिपहिया, कृषि उपकरण, फैक्ट्री मशीनरी, और विंड टर्बाइन — हर जगह इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शुरू हो रहा है।
निष्कर्ष
चीन ने दशकों की मेहनत से रेयर-अर्थ की प्रोसेसिंग पर लगभग पूरा कब्ज़ा बना लिया। भारत के स्टार्टअप्स ने इससे सीधे मुकाबला करने की बजाय एक अलग रास्ता चुना: मैग्नेट की जगह सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स। अभी यह सफ़र शुरुआती है और कई दावों का बड़े स्तर पर परखा जाना बाकी है। फिर भी अगर यह सफल रहा, तो भारत मोटर टेक्नोलॉजी में चीन पर निर्भरता घटा सकता है, और आगे चलकर इसका एक्सपोर्ट भी कर सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. मैग्नेट-फ्री मोटर (Magnet-Free Motor) क्या होती है? यह ऐसी इलेक्ट्रिक मोटर है जिसमें रेयर-अर्थ परमानेंट मैग्नेट नहीं लगता। मैग्नेट का काम इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर या रिलक्टेंस (Reluctance) के सिद्धांत से लिया जाता है।
2. रेयर-अर्थ मैग्नेट (Rare-Earth Magnet) की ज़रूरत क्यों पड़ती है? ये मैग्नेट छोटे आकार में बहुत ताकतवर होते हैं, इसलिए EV और कई मशीनों की मोटरों में इस्तेमाल होते हैं।
3. क्या भारत में रेयर-अर्थ मौजूद नहीं हैं? भारत के पास दुनिया के पाँचवें सबसे बड़े रेयर-अर्थ भंडार हैं, पर इन्हें मैग्नेट में प्रोसेस करने की क्षमता अभी बहुत सीमित है।
4. कौन सी भारतीय कंपनियाँ ऐसी मोटर बना रही हैं? विमैग लैब्स (Vimag Labs), चारा टेक्नोलॉजीज (Chara Technologies), कोनिफर (Conifer) और स्टर्लिंग गेटेक (Sterling Gtake) इस दिशा में काम कर रही हैं।
5. क्या ये मोटरें अभी आम गाड़ियों में मिलने लगी हैं? अभी शुरुआती चरण है। कुछ कंपनियाँ टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर के लिए उत्पादन कर रही हैं, जबकि कई बड़े ऑटोमेकर के साथ अभी परीक्षण (Testing) चल रहे हैं।
चीन ने दशकों की मेहनत से दुनिया के मोटरों को चलाने वाले मैग्नेट पर लगभग पूरा कब्ज़ा जमा लिया। भारत के स्टार्टअप्स ने इससे सीधे मुकाबला करने की बजाय एक समझदारी भरा रास्ता चुना।
स्रोत (Sources):